Pricing-Its meaning, and 5 Important Factors affecting the pricing – In Hindi

मूल्य निर्धारण (Pricing) में, कीमत उस उत्पाद का सटीक मूल्य है जिसके द्वारा एक पक्ष कुछ वस्तुओं या सेवाओं के बदले दूसरे को भुगतान करता है। तो दूसरे शब्दों में हम कह सकते हैं कि खरीदार माल या सेवाओं के बदले विक्रेता को प्रतिफल के रूप में राशि का भुगतान करेगा।

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मूल्य निर्धारण का अर्थ (Meaning of Pricing):

यह (Pricing) उत्पाद की लागत, उसकी धारणा का प्रतिनिधित्व करता है जो विक्रेता द्वारा खरीदार को उत्पाद की बिक्री के समय लिया जाता है। किसी उत्पाद की लागत / मूल्य का निर्धारण करते समय, कंपनी को उस कीमत का ध्यान रखना होता है जो बहुत अधिक या बहुत कम नहीं होनी चाहिए अन्यथा उत्पाद बाजार में विफल हो जाएगा।

मूल्य निर्धारण को प्रभावित करने वाले कारक (Factors affecting Pricing):

बाजार की स्थितियों और अन्य परिस्थितियों के अनुसार कंपनी को उन महत्वपूर्ण कारकों के बारे में सोचना होगा जो इस प्रकार हैं:

1. उत्पाद की लागत (Cost of the Product):

मूल्यांकन को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण कारक उत्पाद की लागत है। इसमें उत्पादन की लागत, बिक्री और प्रचार की लागत, वितरण लागत शामिल होगी। इसे कीमत निर्धारित करने के लिए बेंचमार्क के रूप में जाना जाता है।

उत्पाद की कीमत निर्धारित (Pricing) करते समय कंपनी की तीन प्रकार की लागतें होती हैं:

  • निश्चित लागत: यह प्रकृति में निश्चित है। उदाहरण के लिए, कारखाने के परिसर का किराया, वेतन आदि, निश्चित लागतें हैं।
  • परिवर्तनीय लागत: ये लागत एक इकाई के उत्पादन स्तर के अनुसार बदलती रहती है। यदि कोई उत्पादन नहीं है तो कोई परिवर्तनीय लागत नहीं है। कच्चा माल परिवर्तनीय लागत का एक अच्छा उदाहरण है
  • अर्ध-परिवर्तनीय लागत: इन लागतों में उत्पादन स्तरों के साथ उतार-चढ़ाव भी होता है। उदाहरण टेलीफोन खर्च, सेल्समैन के प्रोत्साहन आदि हैं।

2. उत्पाद की मांग (The Demand for the Product):

कीमत की सीमा उत्पाद की उपयोगिता पर निर्भर करेगी। तो उत्पाद की लागत विक्रेता की चिंता पर निर्भर करती है। उत्पाद की मांग उसकी उपयोगिता और उसकी कीमत पर निर्भर करेगी। मांग का नियम परिभाषित करता है कि कीमत जितनी कम होगी, मांग उतनी ही अधिक होगी।

3. प्रतियोगियों की कीमत (Price of Competitors):

उत्पाद की कीमत निर्धारित करते समय विभिन्न विशेषताओं और अन्य कारकों जैसे वितरण चैनल, प्रचार आदि का भी अध्ययन किया जाना चाहिए। इसमें प्रतिस्पर्धी की नीतियां और ग्राहकों को दिए जाने वाले ऑफ़र भी शामिल हैं।

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4. सरकारी विनियमन (Government Regulation):

नागरिकों को अनुचित व्यवहार और मूल्य निर्धारण से बचाना कंपनी का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए। इसलिए किसी उत्पाद के मूल्य निर्धारण के संबंध में कुछ कानूनों और विनियमों का पालन करना व्यवसायियों का कर्तव्य है कि वे लंबे समय तक जीवित रहें।

5. आर्थिक स्थिति (Economic Condition):

जैसे – उछाल या मंदी, मुद्रास्फीति दर, मूल्य निर्धारण (Pricing) निर्णयों पर बहुत प्रभाव डालती है क्योंकि ये स्थितियां उत्पादन की लागत और उपभोक्ता के खरीद निर्णयों को प्रभावित करती हैं।

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