Capital Market -Its Meaning and 2 Components – In Hindi

पूंजी बाजार (Capital Market) व्यवसाय के लिए मध्यम और दीर्घकालिक निधि प्रदान करता है। इसमें (Capital Market) शेयर, डिबेंचर, बॉन्ड, म्यूचुअल फंड, सरकारी प्रतिभूतियां आदि शामिल हैं।

पूंजी बाजार का अर्थ (Meaning of Capital Market):

पूंजी बाजार (Capital Market) एक ऐसा बाजार है जहां खरीदार और विक्रेता वित्तीय प्रतिभूतियों के व्यापार (ऋण और इक्विटी की खरीद और बिक्री) में शामिल होते हैं। पूंजी बाजार (Capital Market) के उदाहरण अमेरिकन स्टॉक एक्सचेंज, लंदन स्टॉक एक्सचेंज, न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज हैं। दूसरे, इसमें बचतकर्ताओं से उद्यमी उधारकर्ताओं को धन हस्तांतरित करना शामिल है।

परिभाषा (Definition):

“पूंजी बाजार को उस तंत्र के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जो बचत को निवेश या उत्पादक उपयोग में जोड़ता है। यह उन लोगों की बचत के प्रवाह में हस्तक्षेप करता है जो अपनी आय का एक हिस्सा उन लोगों से बचाते हैं जो इसे उत्पादक संपत्तियों में निवेश करना चाहते हैं।

-V.K.Bhalla

पूंजी बाजार के घटक (Components of Capital Market):

घटक इस प्रकार हैं:

1. प्राइमरी मार्केट (Primary Market):

न्यू इश्यू मार्केट/प्राथमिक मार्केट को पहली बार प्रतिभूतियां जारी की गई हैं। यह सीधे पूंजी निर्माण में योगदान देता है। पूंजी बाजार में, कंपनी इन निधियों का उपयोग भवनों, संयंत्रों, मशीनरी आदि में निवेश के लिए करती है। प्राथमिक बाजार ने सामान्य प्रतिभूतियां जैसे इक्विटी शेयर, डिबेंचर, बांड, वरीयता शेयर आदि जारी किए।

इस बाजार में प्रतिभूतियाँ निम्नलिखित विधियों द्वारा जारी की जाती हैं:

1. विवरणिका के माध्यम से सार्वजनिक निर्गम (Public Issue through Prospectus):

जब कंपनियां आम जनता से धन जुटाने के लिए बिचौलियों / बिचौलियों जैसे बैंकरों, दलालों और हामीदारों को शामिल करती हैं, तो इसे प्रॉस्पेक्टस के माध्यम से एक सार्वजनिक मुद्दा माना जाता है।

2. बिक्री के लिए प्रस्ताव (Offer for Sale):

इसमें एक मध्यस्थ (दलालों की फर्म) द्वारा आम जनता को नई प्रतिभूतियों की पेशकश की जाती है जो कंपनी से बहुत सारी प्रतिभूतियां खरीदती हैं। सबसे पहले, कंपनी बिचौलियों को अंकित मूल्य पर प्रतिभूतियां जारी करती है। फिर बिचौलिये लाभ कमाने के लिए आम जनता को अधिक कीमत पर प्रतिभूतियाँ जारी करते हैं।

3. प्राइवेट प्लेसमेंट (Private Placement):

कंपनी द्वारा प्रतिभूतियों को एक निश्चित मूल्य पर एक मध्यस्थ को बेचा जाता है और फिर मध्यस्थ इन प्रतिभूतियों को आम जनता को नहीं बल्कि चयनित ग्राहकों को अधिक कीमत पर बेचते हैं।

कंपनी अपने उद्देश्यों के साथ प्रॉस्पेक्टस जारी करती है। इस पद्धति में, बिचौलिए चयनित ग्राहकों जैसे यूटीआई, एलआईसी, सामान्य बीमा, आदि को प्रतिभूतियां जारी करते हैं।

4. सही मुद्दा (Right Issue (For Existing Companies)):

बाहरी लोगों की सदस्यता लेने से पहले कंपनी को उन्हें प्रतिभूतियों के नए स्टॉक की पेशकश करनी चाहिए। कंपनी अधिनियम 1956 के तहत कंपनियों के लिए यह अनिवार्य है।

5. E-IPOs, (electronic Initial Public Offer):

यह स्टॉक एक्सचेंज की ऑनलाइन प्रणाली में प्रतिभूतियां जारी करने का नया तरीका है। कंपनी पंजीकृत दलालों को आवेदन स्वीकार करने और इलेक्ट्रॉनिक रूप से ऑर्डर देने के लिए नियुक्त करती है।

2. द्वितीयक बाज़ार (Secondary Market (Stock Exchange)):

द्वितीयक बाजार वह बाजार है जहां पहले जारी प्रतिभूतियों की बिक्री और खरीद होती है। द्वितीयक बाजार में, प्रतिभूतियों को मौजूदा निवेशकों द्वारा अन्य निवेशकों को बेचा जाता है।

जब निवेशक को नकदी की आवश्यकता होती है और यदि दूसरा निवेशक कंपनी के शेयर खरीदना चाहता है तो दोनों निवेशक द्वितीयक बाजार में मिल सकते हैं और ब्रोकर से नकदी के लिए प्रतिभूतियों का आदान-प्रदान कर सकते हैं।

विषय पढ़ने के लिए धन्यवाद।


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