5 Important Needs of Maslow’s Hierarchy Theory explained with types – In Hindi

मास्लो का पदानुक्रम सिद्धांत (Maslow’s Hierarchy Theory) बुनियादी जरूरतों की पूर्ति को संदर्भित करता है। जरूरतें (इच्छाएं) प्रेरणा के अभिन्न अंग हैं। संगठन के लक्ष्यों को पूरा करना आवश्यक है। अगर जरूरतें पूरी हो जाती हैं तो कर्मचारी अपने काम/नौकरी के प्रति प्रेरित होते हैं।

अधिक समझने के लिए, हमें मास्लो के सिद्धांत के घटकों के बारे में सीखना होगा। घटकों की व्याख्या शुरू करने से पहले हमें यह जानना होगा कि यह सिद्धांत किसने दिया है? यह सिद्धांत अब्राहम मास्लो (अमेरिकी मनोवैज्ञानिक)(Maslow’s Hierarchy Theory) द्वारा प्रस्तुत किया गया है जिन्होंने मानव प्रेरणा का वर्णन करने के लिए आवश्यकताओं का एक पदानुक्रम विकसित किया है।

मास्लो की आवश्यकता पदानुक्रम सिद्धांत के घटक (Components of Maslow’s Hierarchy theory): 

इन्हें (Maslow’s Hierarchy Theory) एक क्रम में समझाया गया है जो इस प्रकार है:

 1. क्रियात्मक जरूरत (Physiological Needs):

मानव जीवन के अस्तित्व के लिए ये आवश्यकताएं बहुत ही बुनियादी आवश्यकताएं हैं। इसमें भोजन, आश्रय, वस्त्र शामिल हैं। केवल मौद्रिक लाभ से ही कर्मचारी इन बुनियादी जरूरतों को पूरा कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, न्यूनतम मूल वेतन ने प्राथमिक जरूरतों को पूरा किया।

2. सुरक्षा और सुरक्षा की जरूरत (Safety and Security Needs):

बुनियादी जरूरतों की पूर्ति के बाद लोग सुरक्षित भविष्य के बारे में सोचना शुरू कर देते हैं ताकि वे अपनी बुनियादी (शारीरिक) जरूरतों को जारी रख सकें। वे शारीरिक सुरक्षा चाहते हैं जिसमें दुर्घटनाओं, आग और बीमारी से सुरक्षा, और आर्थिक सुरक्षा (भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त धन शामिल है। इसलिए इनसे लोग अधिक संतुष्ट होते हैं। उदाहरण के लिए, स्थायी नौकरी, भविष्य निधि, सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन या में अपंगता आदि का मामला

3. सामाजिक आवश्यकताएं (Social Needs):

इसमें प्यार, स्नेह, दोस्ती आदि शामिल हैं। उदाहरण के लिए, संगठन के सदस्यों के बीच सहयोग, दूसरे शब्दों में, उनके बीच मजबूत संबंध।

4. सम्मान की आवश्यकता (Esteem Needs):

सम्मान और मान्यता इन जरूरतों के मुख्य तत्व हैं। उच्च पद के कर्मचारियों में इस प्रकार की आवश्यकता बहुत आम है। उदाहरण के लिए, पदोन्नति, कर्मचारियों को विशेष शीर्षक, आदि।

5. आत्म-साक्षात्कार की आवश्यकता (Self Actualisation Need):

जीवन के उद्देश्य की पूर्ति। इसमें व्यक्ति भविष्य के बारे में सोचता है कि वह क्या बनना चाहता है और विकास प्राप्त करने के बाद वह अपने निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त कर लेता है। इसमें मुख्य रूप से विकास और उपलब्धियां शामिल हैं।

विषय पढ़ने के लिए धन्यवाद।

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